20 हजार लोगों की कुर्बानी देकर दुनिया का सबसे नया देश बना बोगनविल- जानें खास बातें

दुनिया के मानचित्र पर एक नया देश आने वाला है. ये देश पश्चिम अफ्रीका के देश पापुआ न्यू गिनी से अलग होकर बनेगा. इस देश को बोगनविल के नाम से जाना जाएगा. अलग देश बनाने को लेकर नवंबर महीने के आखिर में जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके नतीजे आ गए हैं. बड़ी संख्या में लोगों ने पापुआ न्यू गिनी से अलग होकर नया देश बनाने के लिए वोट किया है. इस क्षेत्र के करीब 98 फीसदी लोगों ने नया देश बनाने के लिए वोट किया है.


मतदान के दौरान ही मिल गए थे संकेत


नया देश बनाने को लेकर जब जनमत संग्रह शुरू किया था, तभी यह लगने लगा था कि बड़ी संख्या में इसके पक्ष में वोटिंग होगी. जिस दिन वोटिंग शुरू हुई थी बुका (राजधानी) में मतदान केंद्र पर सुबह ही 1000 से अधिक लोगों को पंक्ति में खड़े देखा गया. मतदान करने आए लोग स्वतंत्रता के समर्थन में झंडे फहराते और गीत गाते नजर आए थे. क्षेत्र में स्थापित किए गए 21 मतदान केंद्रों पर इसी प्रकार का नजारा देखने को मिला था.बुका के छोटे द्वीपों से लोगों को मतदान के लिए शहर लाने की खातिर दर्जनों नौकाओं का प्रयोग किया गया था. इन नौकाओं पर


स्वतंत्रता के समर्थन में झंडे लगे थे. करीब दो सप्ताह चली वोटिंग के दौरान दो लाख लोगों ने मत का प्रयोग किया.


बोगनविल के बारे में खास बातें


-बुका टाउन या बुका द्वीप इसकी राजधानी बनेगी जिससे देश के सभी सरकारी कामकाज शुरू किए जाएंगे.


इस समय इस क्षेत्र में करीब तीन लाख आबादी है. इस आबादी में ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण इलाकों का है. इस क्षेत्र में राजधानी बुका के अलावा दो और महत्वपूर्ण शहर हैं-अरावा और बुइन. 2011 की जनगणना के मुताबिक इस क्षेत्र की जनसंख्या 2,49, 358 थी.


-नया देश बनाने के लिए कराए गए जनमत संग्रह में करीब दो लाख वोटरों का नाम रजिस्टर किया गया था.


-इस इलाके की स्थानीय भाषा आम तौर पर टोक-पिसिन है. जो कुछ-कुछ पापुआ न्यू गिनी में बोली जाने वाली अंग्रेजी की तरह है. हालांकि इसके अलावा यहां करीब 19 स्थानीय भाषाएं भी बोली जाती हैं. लेकिन कनेक्टिंग लैंग्वेज के तौर पर टोक-पिसिन का ही इस्तेमाल होता है.


-बोगनविल द्वीप का नाम फ्रांसीसी नाविक लुई डे एंटोनियो बोगनविल के नाम पर है. इसी नाविक ने इस क्षेत्र की खोज की थी.


-19वीं सदी में बोगनविल पर जर्मनी का शासन था. द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने इस क्षेत्र का इस्तेमाल मिलिट्री बेस के तौर पर किया था. और फिर 1975 तक यहां ऑस्ट्रेलिया का शासन रहा. इसके बाद आजाद होकर पापुआ न्यू गिनी देश बना जिससे अलग अब बोगनविल बनने वाला है.


-इस इलाके में मौजूद संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर बोगनविल के लड़ाकों और पापुआ न्यू गिनी की सेना के बीच लंबे समय तक संघर्ष भी हो चुका है. 1989 में शुरू हुआ यह संघर्ष 1998 में समाप्त हुआ था. आंकड़ों के मुताबिक इस संघर्ष में करीब 20 हजार लोगों की जान गई थी.-बोगनविल की आजादी के बाद इस बात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कि ये आर्थिक रूप से खुद को कैसे स्थापित करेगा. बोगनविल के उपराष्ट्रपित रेमंड मसोनो का कहना है कि वो देश के माइनिंग नियमों को पूरी तरह से बदल कर रख देंगे. वो आर्थिक प्रगति को पहले नंबर पर रखेंगे. उनके मुताबिक बोगनविल प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ देश है और इसी के जरिए देश आगे प्रगति भी करेगा.


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